एक सज्जन दोस्त मिलें, उनकी शादी होने वाली थी. मैंने फरमाया की ''भाई दो दिन रह गए हैं शादी में और आप बाहर तशरीफ़ फ़रमा हैं जाईये घर में बैठिये हल्दी-वल्दी लगवाइए रस्मों रिवाजों को अंजाम दीजिये'' तो उन्होंने तपाक से कहा ''ये रसूल की सुन्नतों के खिलाफ हैं हदीसों में इसका कोई ज़िक्र नहीं है बल्कि ये मुशरिकों का तरीका है'' मैंने मन ही मन सोचा की भई वाह चलो कोई तो मिला जो इन रस्मों रिवाजों के ढकोसलों को जूतियों पर रखता हो. मेरी नज़र उनके घर के दरवाज़े पर पड़ी तो मैंने उनसे पूछ लिया की ''भाई जान इस दरवाज़े को इतना चोड़ा क्यूँ करवा दिया'' तो उन्होंने झट से मुस्कुराते और साथ ही शरमाते हुए कहा की ''अरे मियां होंडा सिटी मिल रही है निक़ाह में उसे क्या बाहर रास्ते में खड़ा करेंगे उसके लिए पहले दरबा तो बनवाएं फिर शान से घर में खड़ी कर के दिखाएँगे'' मैंने मन में कहा की ''भई वाह क्या खूब रसूल की सुन्नतों और हदीसों पर चल रहे हो'' मैंने सलाम किया और पतली गली पकड़ ली.......
Monday, November 14, 2011
Sunday, October 2, 2011
पहला e-लेख
बहुत दिनों से दबाव डाला जा रहा था की अपना ब्लॉग बनाइये.तो आज मन मसोस कर ब्लॉग बना ही दिया.क्या पता इन्टरनेट कल हो न हो? आशा है आपको इसका शीर्षक पसंद आया होगा.जो ब्लॉग बनाने से पहले सबसे बड़ी दुविधा होती है .लेकिन मैंने केवल ऐसे ही बिना सोचे समझे इसका ये शीर्षक रख दिया मैं कोशिश करूँगा की इस मुठभेड़ के ज़रिये मैं आपको राजनीतिक,सामाजिक,सांस्कृतिक साहित्यिक और मनोरंजन क्षेत्र से हुयी मेरी मुठभेड़ों से आपको रूबरू करा सकूँ.
अभी नया हूँ तो मैं आपसे निवेदन करूँगा की आप मेरी गलतियों की तरफ मेरा ध्यान आकर्षित करें जिससे मैं भी अपनी त्रुटियों को समझ सकूँ और अपने आप से उम्मीद करूँगा की मैं नियमित तोर से इस पर लिख सकूँ और जो इसको बनाने का सबसे पहला उद्देश्य है वो भी पूरा हो सके.
आज दो अक्टूबर है और आज ही के दिन मैंने इसका शुभ आरम्भ किया है गाँधी जी के बताये हुए आदर्शों पर हम चले और एक सफल राष्ट्र का निर्माण करें.
ज्यादा कुछ अब मेरे पास भी कहने को नहीं है तो अब मैं सीधा आपसे अपनी मुठभेड़ों के माध्यम से ही रूबरू होंगा तब तक के लिए
आज दो अक्टूबर है और आज ही के दिन मैंने इसका शुभ आरम्भ किया है गाँधी जी के बताये हुए आदर्शों पर हम चले और एक सफल राष्ट्र का निर्माण करें.
ज्यादा कुछ अब मेरे पास भी कहने को नहीं है तो अब मैं सीधा आपसे अपनी मुठभेड़ों के माध्यम से ही रूबरू होंगा तब तक के लिए
जय हिंद .........
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