Sunday, October 2, 2011

पहला e-लेख

बहुत दिनों से दबाव  डाला जा रहा था की अपना ब्लॉग बनाइये.तो आज मन मसोस कर ब्लॉग बना ही दिया.क्या पता इन्टरनेट कल हो न हो? आशा है आपको इसका शीर्षक पसंद आया होगा.जो ब्लॉग बनाने से पहले सबसे बड़ी दुविधा होती है .लेकिन मैंने केवल ऐसे ही बिना सोचे समझे इसका ये शीर्षक रख दिया मैं कोशिश करूँगा की इस मुठभेड़ के ज़रिये मैं आपको राजनीतिक,सामाजिक,सांस्कृतिक साहित्यिक और मनोरंजन क्षेत्र से हुयी मेरी मुठभेड़ों से आपको रूबरू करा सकूँ.
अभी नया हूँ तो मैं आपसे निवेदन करूँगा की आप मेरी गलतियों की तरफ मेरा ध्यान आकर्षित करें जिससे मैं भी अपनी त्रुटियों को समझ सकूँ और अपने आप से उम्मीद करूँगा की मैं नियमित तोर से इस पर लिख सकूँ और जो इसको बनाने का सबसे पहला उद्देश्य है वो भी पूरा हो सके.
आज दो अक्टूबर है और आज ही के दिन मैंने इसका शुभ आरम्भ  किया है गाँधी जी के बताये हुए आदर्शों पर हम चले और एक सफल राष्ट्र का निर्माण करें.
ज्यादा कुछ अब मेरे पास भी कहने को नहीं है तो अब मैं सीधा आपसे  अपनी मुठभेड़ों के माध्यम से ही रूबरू होंगा तब तक के लिए 
जय हिंद .........

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